• एक दिन का दान हमेशा कल्याण 
  • सोने चांदी की खरीदारी से ज्यादा महत्व दान का  

अक्षय तृतीया इस बार 26 अप्रैल को पड़ रही है। इसे हिन्दुओं का महत्वपूर्ण तिथि मानी गई है। इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है अर्थात किसी भी मांगलिक कार्य को बिना किसी पंडित या पुरोहित से पूछे बगैर भी किया जा सकता है। वृंदावन के आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री कहते हैं कि कई मयानों में इस बार की यह तिथि विशेष बन पड़ी है। दरअसल इस बार राजयोग बन रहा है। इस बार सूर्योदय के समय शश, रूचक, अमला, पर्वत, शंख और नीचभंग राजयोग बन रहे हैं। इनके साथ ही महादीर्घायु और दान योग भी बन रहे हैं। ये सभी योग सूर्य, मंगल, बुध, बृहस्पति और शनि के कारण बन रहे हैं। इन योगों के प्रभाव से स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए दिन और भी खास बन गया है। इन शुभ योगों में किए गए दान से रोग का नाश होता है और लंबी उम्र मिलती है। दूसरी ओर हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष रविवार का दिन होने और रोहणी नक्षत्र ने भी दिन को अत्यंत पावन बना दिया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। चूंकि इस बार भगवान सूर्य के दिन रविवार को यह तिथि है इसलिए सुबह स्नान आदि के बाद तांबे के बर्तन में शुद्ध जल लेकर भगवान सूर्य को पूर्व की ओर मुख करके चढ़ाएं और इस मंत्र का जप करें- ‘ॐ भास्कराय विग्रहे महातेजाय धीमहि, तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्’,  इस प्रक्रिया को इसी दिन से शुरू कर हमेशा के लिए जीवन में उतारें। मान्यता है कि ऐसा करने से आपका भाग्य चमक उठेगा। यदि यह उपाय सूर्योदय के एक घंटे के भीतर 7 बार किया जाए तो और भी शीघ्र फल की प्राप्ति होती है। इस तिथि को आखा तीज भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है की इस दिन किया गया दान कभी आपकी झोली खाली नहीं होने देता।

अक्षय तृतीया का महत्व

अक्षय तृतीया का पावन पर्व वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। अक्षय का मतलब है जिसका कभी क्षय न हो अर्थात जो कभी नष्ट न हो। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं उसका फल सैकड़ों गुणा मिलता है। भविष्य पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया पर तिथि का विशेष महत्व होता है। सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ भी इसी तिथि से हुआ था। इस दिन बिना पंचांग देखे भी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि किया जा सकता है। 

जरुरी नहीं कि सोना चांदी ही खरीदें…

अक्षय तृतीया के दिन लोगों में सोना चांदी आदि खरीदने कि परंपरा चल पड़ी है। वह इसलिए क्योंकि मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई किसी भी वस्तु का नाश नहीं होता लेकिन पुराणों के अनुसार इस दिन खरीदारी से कहीं ज्यादा महत्व दान का बताया गया है। इस दिन दान करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जो कभी ख़त्म नहीं होता और परेशानियों से लड़ने की ताकत मिलती है और सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। 

इन चीज़ों का करें दान… 

सुख-समृद्धि के लिए अक्षय तृतीय पर गरीबों को आटा, चावल, दाल, फल, सब्जियां दान करें। गर्मी से राहत के लिए गरीबों को जल पात्र, घड़ा, पानी वाले जग दान करें। स्वास्थ्य रहने के लिए गरीबों व ज़रूरत मंदों व मरीजों को चिकित्सक कि सलाह पर दवा दान करें। ऐसा करने से आपको निरोगी काया प्राप्त होगी। घड़ा भी दान कर सकते हैं। जल से भरा घड़ा मन्दिर में दान करने से त्रिदेव प्रसन्न होते हैं। 

इस बार घर में ही करें गंगा स्नान…. 

अक्षय तृतीया/आखातीज पर अबूझ मुहूर्त माना गया है। इस दिन किया हुआ जप, तप, ज्ञान तथा दान अक्षय फल देने वाला होता है अतः इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहते हैं। वैसे तो अक्षय तृतीया पर पवित्र नदियों व समुंद्र में स्नान का काफी महत्व हैं लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन की स्थिति में घर पर ही गंगा स्नान करें। अगर घर में गंगा जल है तो स्नान वाले जल में कुछ बूँद मिला लें और अगर ये भी नहीं तो माँ गंगा का स्मरण कर भी स्नान कर सकते हैं अथवा जल में कोई सोने का आभूषण डालकर भी स्नान कर सकते हैं।

न करें मांगलिक कार्य…. 

इस साल अक्षय तृतीया पर कोरोना महामारी के कारण सामूहिक कार्यक्रमों का आयोजन तो हो नहीं सकता। मांगलिक कार्यक्रम भी टाल दें। बृहस्पति संहिता ग्रंथ में ये उल्लेख है कि महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और आपातकाल के दौरान मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए या आने वाले शुभ मुहूर्त पर टाल देना चाहिए। बृहस्पति संहिता का श्लोक

दिग्दाहे वा महादारुपतने चाम्बुवर्षणे ।

उल्कापाते महावाते महाशनिनिपातने ।।

अनभ्राशनिपाते च भूकम्पे परिवेषयोः । 

ग्रामोत्पाते शिवाशब्दे दुर्निमित्ते नशोभने ।

माँ लक्ष्मी को भी पूजें…. 

अक्षय तृतीया के दिन घर के सभी स्वर्ण आभूषणों को कच्चे दूध और गंगाजल से धोने के बाद उन्हें एक लाल कपड़े पर रखकर केसर, कुमकुम से उनका पूजन करें। पूजन करते समय उन पर लाल फूल भी चढ़ाएं।

 ऐसा करने के बाद महालक्ष्मी के मंत्र ‘ऊं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मयै नम:” मंत्र की एक माला का जाप करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उनकी आरती करें। शाम को इन आभूषणों को तिजोरी में रख दें।

ये करें संकल्प 

अक्षय तृतीया पर कोई भी दान निकाले तो संकल्प करें और ज़ब लॉक डाउन खुल जाये व स्थिति सामान्य हो जाये तो दान कर दें।