AKTU और KGMU का संयुक्त अनुसंधान विकसित कर रहा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कोविड-19 डायग्नोसिस टूल

10 May 2020, Sunday

Archana Sharma

लखनऊ/VMN/ AKTU/ KGMU Covid-19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए देश के तमाम उच्च स्तरीय चिकित्सालय और विश्वविद्यालयों में शोध कार्य भी बढ़े हैं। ताकि कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी से निपटने के लिए कोई न कोई समाधान, दवा अथवा वैक्सीन के रूप में सामने आ सके। इसी क्रम में AKTU और KGMU ने संयुक्त अनुसंधान करने का निर्णय लिया। दोनों मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कोविड-19 डायग्नोसिस टूल विकसित करेंगे, जिसके सहयोग से कोविड-19 रोगियों की पहचान जल्द की जा सकेगी। इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित माडल में जांच के लिए एक्स-रे इमेज का प्रयोग किया जाएगा। इसकी जानकारी 9 मई को एकेटीयू के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक एवं चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एमएलबीभटट् ने वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में दी। 

 इस अवसर पर डॉ अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने बताया कि कंप्यूटर क्रिज़न की मदद से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित मॉडल में मेडिकल इमेजेज़ का उपयोग करते हुए covid-19 रोगियों की पहचान करने के लिए  टूल विकसित किया  सकता है। इस दिशा में कुछ शुरुआती कार्य अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और कुछ अन्य देशों के शोधकर्ताओं द्वारा किये जा रहे हैं।

सटीक सिस्टम विकसित करने के लिए उचित डेटासेट महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 की जांच के लिए प्रस्तावित अनुसंधान में कोविड-19 के रोगियों के चेस्ट एक्स-रे इमेजेज  का संग्रह शामिल होगा। कोविड-19 रोगियों की जाँच के लिए विकसित किए जाने वाले आर्टिफिशियल इंटेलीजेन्स आधारित माडल में चेस्ट एक्स-रे इमेजेज के डेटासेट का उपयोग किया जाएगा। डेटासेट को कोविड-19, निमोनिया, एसएआरएस (SARS), फ़्लू और सामान्य लोगों के चेस्ट एक्स-रे छवियों की ज़रूरत होती है, ताकि विकसित प्रणाली कोविड-19 को अन्य प्रकार की बीमारी से अलग कर सके।  कुलपति ने बताया कि इसमें कोविड-19 रोगियों के चेस्ट एक्स-रे या सीटी स्कैन का सामान्य व्यक्ति, सामान्य फ्लू, निमोनिया रोगियों के चेस्ट एक्स-रे या सीटी स्कैन आदि से विश्लेषण किया जाएगा। इस तरह  डिस्क्रीमनेट्री फीचर्स का उपयोग करके आर्टिफिशियल इंटेलीजेन्स आधारित मॉडल को प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही इस माडल के स्वचालित वर्गीकरण के लिए डीप लर्निंग सीएनएन नेटवर्क का भी उपयोग किया जाएगा।

इस अवसर पर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एमएलबी भटट् ने बताया कि इस प्रक्रिया में केजीएमयू द्वारा covid-19 रोगियों और नान covid-19 रोगियों का डेटा प्रदान किया जायेगा, जिसके बाद एकेटीयू के वैज्ञानिक मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से माडल को विकसित करेंगे। मॉडल विकसित करने के उपरांत इस उपकरण की मदद से covid-19 मरीजों की पहचान की जा सकेगी। इस तरह से covid-19 रोगियों की पहचान के लिए एक परफेक्ट डायग्नोस्टिक उपकरण विकसित किया जा सकेगा। इस संयुक्त अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य एक आसान स्टैंडलोन प्रणाली विकसित करना है, जो रियल टाइम सिचुएशन में मेडिकल छवियों की मदद से कोविड-19 रोगियों की पहचान कर सके।

कुलपति ने बताया कि एकेटीयू और केजीएमयू के संयुक्त सहयोग के अतिरिक्त कुछ और संस्थान भी इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल को विकसित करने के लिए  मेडिकल  इमेज सैंपल उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगे। इनमें उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विवि, सैफई, इटावा, राजकीय मेडिकल कॉलेज, कोटा, सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा शामिल हैं। इन सभी चिकित्सा संस्थानों से मेडिकल इनपुट के साथ और कई इंटरनेशनल लैब के सहयोग  से इस संयुक्त अनुसन्धान को सफल बनाया जायेगा। 

इस मौके पर इस प्रोजेक्ट में शामिल प्रो एमके दत्ता, अधिष्ठाता, पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज एंड रिसर्च , एकेटीयू ने बताया कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपकरण ह्रदय और फेफड़ों के साउंड से कार्डिक और प्लमोनरी बिमारियों को डायग्नोज करने में सक्षम है। प्रो दत्ता ने बताया कि इस संयुक्त अनुसंधान में covid-19 रोगियों की पहचान करने के लिए सभी संभावित मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग की प्रविधि का प्रयोग किया जायेगा। इससे covid-19 रोगियों की पहचान के लिए एक परफेक्ट डायग्नोस्टिक उपकरण किया जा सकेगा। प्रो दत्ता का फंडस इमेज से डायबिटिक रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा और मैक्यूलर एडमा जैसी गंभीर बीमारियों का पता लगाने के लिए एआई आधारित रेटिना इमेज विश्लेषण में भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। प्रो दत्ता का अधिकांश शोध कार्य संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, चेक गणराज्य, स्पेन, जर्मनी, ताइवान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, कोरिया आदि के वैज्ञानिकों के सहयोग से है।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष, रेडियोडायग्नोसिस विभाग केजीएमयू, डॉ  नीरा मलिक ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग वर्ष 1956 से आईबीएम में किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल ऑटोमेटेड प्लेन, कार इत्यादि में किया गया। चिकित्सा क्षेत्र में इसका प्रयोग इस सदी में कार्डियोलाजी एवं रेडियोलाजी के क्षेत्र में किया गया। इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित माडल के माध्यम से एलोरिद्म जेनेरेट किया जा सकेगा, जिससे कोविड-19 मरीजों की डायग्नोस करने में आसानी होगी।

केजीएमयू, रेडियोडायग्नोसिस विभाग के डॉ अनीत परिहार ने बताया कि इस ऑटोमेटेड टूल के माध्यम से निरंतर कोविड-19 तथा अन्य बीमारियों को जल्द डायग्नोस किया जा सकेगा जबकि मानव श्रमशक्ति सीमित समय तक ही काम कर सकती है। इस ऑटोमेटेड टूल के सहयोग से कम समय में ज्यादा से ज्यादा मरीजों को डायग्नोस करने के साथ ही जैसे-जैसे इसकी अक्यूरेसी बढ़ती जाएगी इससे स्क्रीनिंग टेस्ट में भी बढ़ौतरी होती जाएगी।