• कोरोना वायरस को देखते हुए किया गया है इसका इज़ाद 
  • एकेटीयू व पीजीआई मिलकर बना रहे हैं यह वेंटीलेटर 
  • 10 दिन के अंदर तैयार होकर पहुंचेंगे अस्पताल 

(लखनऊ/VMN) अभी तक आपने केवल एक वेंटीलेटर (प्राण वायु ) को एक समय में एक ही व्यक्ति की जान बचाते हुए देखा होगा लेकिन जल्द ही लखनऊ के पीजीआई अस्पताल को एक ऐसा वेंटीलेटर मिलने वाला है जो एक साथ चार को जीवनदान देगा और संक्रमण का खतरा भी नहीं होगा। इसकी इज़ाद कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए की गईं है ताकि ज़रूरत पड़ने पर अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके। गौरतलब है कि 1 करोड़ 25 लाख जनसंख्या वाले देश में मात्र एक लाख वेंटीलेटर ही उपलब्ध हैं जो की किसी भी बड़ी मुसीबत से निपटने के लिए काफी नहीं ऐसे में इस अनोखे तरह के वेंटीलेटर से एक उम्मीद जगी है। साथ ही वेंटीलेटर की कमी से जूझ रहे अस्पतालों को भी राहत मिलेगी। 

इसकी जानकारी डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक (एकेटीयू) विवि के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने दी। 6 अप्रैल को उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश कोविड केअर फंड में 21 लाख रुपये के चेक प्रदान करते हुए इस बात की जानकारी दी और ये भी कहा की जल्द से जल्द ये वेंटीलेटर अस्पताल को दे दिए जायेंगे। इस मौके पर प्रो पाठक ने कोविड 19 को नियंत्रित करने के लिए एकेटीयू द्वारा किये जा रहे कार्यों के बारे में भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया। 

उन्होंने ने बताया कि विवि ने एसजीपीजीआई के संयुक्त-तत्वाधान में बनाए गए वेंटीलेटर स्प्लिटर एडाप्टर के साथ ही फेस शील्ड के बारे में भी बताया। जिसे पीजीआई द्वारा बहुत सराहा गया है। प्रो पाठक ने बताया कि जल्द ही विवि चिकित्सालयों को अधिकाधिक मात्रा में फेस शील्ड उत्पादित कर मुफ्त प्रदान करेगा। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एकेटीयू द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना की। साथ ही उन्होंने एकेटीयू से एन-95 मास्क भी विवि की लैब में तैयार करने की बात कही, जिस पर विवि के कुलपति प्रो पाठक ने एन-95 मास्क जल्द ही  तैयार कर वितरित करने का अश्वासन दिया।

  कोरोना वाइरस संक्रमण की आपात स्थिति से निपटने के लिए एसजीपीजीआई के साथ मिलकर वेंटिलेटर स्प्लिटर एडाप्टर एवं थ्री डी प्रिंटेड फेस सील्ड मास्क तैयार कर रहा है। कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने कहा कि इस एडाप्टर के जरिए एक वेंटीलेटर पर एक मरीज को दी जाने वाली सुविधा 4 मरीजों को दी जा सकेगी। अभी एक वेंटीलेटर एक ही मरीज के काम आता है। पीजीआई की टीम ने एक ऐसा तकनीक निकाली है कि एक ही वेंटीलेटर से 4 मरीजों को सुविधा दी जा सके। इस तकनीक में संक्रमण को रोकने की भी क्षमता होगी ताकि एक मरीज का संक्रमण दूसरे को न पहुंचे। इस एडाप्टर को सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज की थ्री डी लैब में तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि एकेटीयू को वेंटिलेटर स्प्लिटर एडाप्टर तैयार करने का प्रोजेक्ट दिया था, जिसके बाद एकेटीयू ने अपने परिसर स्थित थ्री डी प्रिंटिंग लैब में वेंटिलेटर स्प्लिटर एडाप्टर को प्रिंट कर पीजीआई को टेस्ट करने के लिए दिया है | पीजीआई वेंटिलेटर स्प्लिटर एडाप्टर का टेस्ट कुछ दिन में कर लेगा और फिर बड़े स्तर पर इसका प्रोडक्शन कर वेंटीलेटर कि कमी दूर कि जाएगी। उन्होंने बताया कि थ्री डी प्रिंटेड फेस सील्ड डॉक्टर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ को सुरक्षित रखने में सहायक है | इसलिए इसकी भी जल्द ही अस्पतालो में मुहैया कराया जायेगा।

क्या है फेस शील्ड 

फेस शील्ड एक प्रकार का चेहरा सुरक्षा कवच है जोकि किसी भी ऐसे कार्य को करते हुए पहना जाता है जिससे चेहरे को कोई हानि न हो और न ही किसी तरह का संक्रमण प्रभावित कर सके। इसे कोरोना वयरस कि जाँच कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए खासा लाभकारी माना गया है।