लखनऊ. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने 6 दिसंबर से पहले श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार  याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी बोर्ड ने अपने ट्वीटर पर दी।

बोर्ड के सचिव व वकील जफरयाब जिलानी ने कहा- हम संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुर्नविचार याचिका दायर करने जा रहे हैं। इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड के फैसले का कानूनी तौर पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सभी मुस्लिम संगठन पुनर्विचार याचिका पर एक राय रखते हैं।

जिलानी अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के भी वकील थे। लेकिन, फैसला आने के बाद उन्होंने खुद को सुन्नी वक्फ बोर्ड से अलग कर दिया। जिलानी ने कहा- मुस्लिम संगठन पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ खड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो पुनर्विचार  याचिका का विरोध कर रहे हैं, वे किसी एक शहर में जाकर मुसलमानों का जलसा बुलाएं और उनकी राय सुनें। बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अयोध्या केस में वादी नहीं था।

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने याचिका न दाखिल करने का लिया निर्णय
इससे पहले मंगलवार को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं की जाएगी। बैठक में 7 में से 6 सदस्यों ने इस पर सहमति दी। बोर्ड के 8 सदस्यों में से एक इमरान माबूद खां बैठक में नहीं पहुंचे थे। वहीं, बोर्ड सदस्य अब्दुल रज्जाक एक ऐसे इकलौते सदस्य थे, जिन्होंने पुर्नविचार याचिका दाखिल करने की मांग की थी।

हम करेंगे दावेदारी-बनाएंगे अस्पताल: वसीम रिजवी
यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा- हमने एक प्रस्ताव पारित किया है कि अगर सुन्नी वक्फ बोर्ड 5 एकड़ भूमि को स्वीकार करने से इंकार करता है, तो भूमि हमें दी जाए, इसके लिए दावेदारी करेंगे। हम उस जमीन पर एक अस्पताल बनाएंगे, जहां सभी धर्मों के लोगों का मुफ्त इलाज किया जाएगा।