• आज प्रधानमंत्री शहर में करेंगे गंगा का  मुआयना
  •  नाले बंद किए गए और घाटों पर हुई सफाई

RAJAT SAXENA

(कानपुर/VMN) भारत के लगभग 2525 किलोमीटर लंबे भूभाग पर बहती गंगा देशवासियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। आस्था की यह नदी भारत वासियों के लिए पवित्रता का परिचायक है। हिमालय की गोद से निकली  यह नदी देश के 4 राज्यों से होती हुई बंगाल की खाड़ी में विश्राम करती है। गंगा पौराणिक काल से भारत वासियों के लिए पूज्यनीय रही है। विभिन्न राज्यों के विभिन्न शहरों से गुजरी  यह वर्तमान में अत्यधिक दूषित हो चुकी है। कई सरकारें आई और चली गई लेकिन गंगा का प्रदूषण बदस्तूर जारी रहा। वर्तमान सरकार गंगा को लेकर कुछ संजीदा तो दिखी लेकिन पिछले कार्यकाल में कुछ ऐसा नहीं दिखा जिससे यह कहा जा सके गंगा का जल एक बार फिर  निर्मल और स्वच्छ हो गया है। एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा जल को पेयजल बनाने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी का नतीजा है कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक शनिवार 14 दिसंबर को शहर (कानपुर) में करने का निर्णय लिया।  यह बैठक चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं औद्योगिक विश्वविद्यालय मिस में 11:00 बजे से प्रारंभ होगी। उनके आगमन के चलते शहर के गंगा घाटो, तटों की सफाई और गंगा में गिर रहे नालों को आनन-फानन में बंद किया गया। 

 आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शहर में है।  गंगा तट पर बने अटल घाट सहित गंगा नदी का मुआयना करेंगे। अभी हाल में ही  बंद किए गए सीसामऊ नाले स्थल पर हो सकता है सेल्फी भी लेंगे ऐसा अधिकारियों के द्वारा बताया जा रहा है। गंगा एक्शन प्लान के तहत 1986 से 2017 तक लगभग 4800  करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। अगर इतनी बड़ी धनराशि की बात की जाए तो यही कहा जाएगा कि सफाई के मामले में मामला सिफर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा सफाई को लेकर नमामि गंगे अभियान की शुरुआत की जिसको लेकर वह तो संजीदा हैं लेकिन शायद उनका तंत्र उनकी मंशा पर खरा नहीं उतर रहा है।  इसी का नतीजा है कि एक पंचवर्षीय कार्यकाल पूर्ण करने के बाद भी गंगा सफाई उतनी नहीं हो सकी जितनी प्रधानमंत्री को आशा थी। इन सब को देखते हुए गंगा सफाई अभियान नमामि गंगे की अगुवाई करते हुए कानपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक करने का निर्णय लिया और वह 4 राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिमी बंगाल के  मुख्यमंत्रियों को इसमें शामिल होने का निर्देश दिया। यह वही चार राज्य हैं जहां से गंगा नदी होकर बहती है और यह भी कह सकते है कि यहीं से गंगा मैली होती है।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह बैठक गंगा को जीवनदान देने के लिए महत्वपूर्ण है।  इसमें उन सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा जिनसे गंगा मैली होती है, दूषित होती है या कहे जहरीली होती है।  गंगा सफाई को लेकर विभाग ने ना जाने कितने ही आंकड़े प्रस्तुत किए होंगे लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ कि गंगा अपने पिछले  सफाई के आंकड़ों से ज्यादा साथ निकली हो। पूरा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नमामि गंगे के इस अभियान की ओर टकटकी लगाए बैठा है। 

गंगा नदी के किनारे बसे प्रमुख शहर

उत्तराखण्ड – टिहरी, देवप्रयाग श्रषिकेश, हरिद्धार

उत्तर प्रदेश – विजनौर, कनौज कानपुर, इलाहाबाद, मिर्जापुर बनारस, गाजीपुर, बलिया

बिहार – पटना, मुगेंर, भागलपुर

पश्चिम बंगाल – फरक्का

कौन-कौन से नाले हैं शहर में 

 

सीसामऊ नाला                  रानी घाट नाला              डबका नाला

परमिया नाला                     मैगजीन घाट नाला        परमट नाला

शीतला बाजार नाला           वाजिदपुर  नाला            एयरफोर्स नाला

रामेश्वर नाला                       गंदा नाला                     गोलाघाट नाला

भगवत दास घाट नाला        गुप्तारघाट नाला           बुधिया घाट नाला 

 

प्रधानमंत्री जी ! मेरा सुझाव मान लीजिए कभी न दूषित होगी गंगा

गंगा के किनारे बसे हुए शहर गंगा को मैला ही नहीं  बल्कि जहरीला भी कर रहे हैं। शहरों से निकले नालों को रोकने से अच्छा है कि क्यों न  शहरों में प्रवेश से लेकर शहर पार तक उस तरफ जिस तरफ से दूषित नाले निकले हैं  उस तरफ गंगा के किनारे किनारे बड़े-बड़े पाइप बिछा दिए जाएं जिससे शहर से आने वाले नालों का गंदा पानी गंगा में न  गिरकर इन पाइपों में गिरे और सीधा ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच जाए। 

अभी तक  गंगा सफाई को लेकर हजारों करोड़  रुपए इस अभियान में लग चुके हैं। यदि गंगा के किनारे किनारे पाइप लगा दिए जाएं और आवश्यकता के अनुसार थोड़ी थोड़ी दूरी पर इन पाइपों की सफाई के लिए बड़े-बड़े टैंक बनाकर उनमें ढक्कन लगा दिया जाए तो हो सकता है जब कभी सफाई की आवश्यकता हो तो पाइपलाइन  को साफ किया जा सके। इससे शहरों में बिछे नालों के जाल को छेड़ने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी और न ही सड़कों को खोदना पड़ेगा। 

आए दिन शहरों का विस्तार होता है नए आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाते हैं कहां तक नालों को बंद करना या उनका मुख मोड़ना किया जाता रहेगा।  इस व्यवस्था से वर्तमान ही नहीं बल्कि भविष्य में भी कभी कोई नाला गंगा में नहीं मिल सकेगा और गंगा हमेशा के लिए स्वच्छ हो जाएगी। क्यों न  इस प्रयोग को कानपुर से ही शुरू किया जाए क्योंकि गंगा सबसे ज्यादा गंदी भी यही से होती है। अगर कानपुर की बात की जाए तो बिठूर सलेमपुर से लेकर कानपुर शहर को पार करते हुए ग्राम भिटारा तक लगभग 50 किलोमीटर की दूरी है।