• लॉक डाउन के चलते आचार्य ने दी सलाह
  • माँ दुर्गा की कृपा में नहीं होगी कोई कमी 

देश भर में जहाँ एक ओर कोरोना वायरस का भय लोगों में व्याप्त है और लोग घरों में दुबके हुए हैं तो दूसरी ओर माता के नवरात्र की अष्टमी और नवमी पर होने वाले परम्परागत कन्या पूजन को भी लोग चिंतित हैं कि ऐसी परस्थित में कन्या व कन्या का समूह कैसे घर बुलाई जाये व कैसे उनकी पुजा कर दान दक्षिणा दिया जाये। इस पर वृंदावन के आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को कुछ उपाय बताया है। उन्होंने शास्त्रों के अनुसार बताया कि नवरात्र के दिनों में हर दिन 1, 3, 5, 9, 11 विषम संख्या में अपनी क्षमता के अनुसार कन्या का पूजन करना चाहिए। अगर हर दिन संभव न हो तो अष्टमी, नवमी को भी कन्या पूजन कर सकते हैं लेकिन लॉक डाउन की स्थिति में व्रतियों व श्रद्धालुओं के लिए ये समस्या हो सकती है कि वह कैसे अपने घर कन्या को आमंत्रित करें। इस कठिन समय में आप घर के बाहर से कन्या को आमंत्रित किए बिना भी कन्या पूजन कर सकते हैं और उसका लाभ भी पूरा मिलेगा। 

घर में रहते हुए ऐसे करें कन्या पूजन 

उपाय….एक 

अपने घर की बेटी, भतीजी आदि कन्याओं को भोजन करवाकर उनका पूजन करें लेकिन पूजन से पहले आप हाथ में जल लेकर यह संकल्प करें कि नवरात्र में कन्या पूजन के लिए मैं अपनी पुत्री को देवी मानकर उनका पूजन करता या करती हूं। कन्या को मीठा भोजन कराएं और जो भी दान देना हो उन्हें देवी भाव से ही भेंट करें। उस भेंट पर आप अपना अधिकार न दिखाएं। नवरात्र के दौरान कन्या का अपमान न करें।

 

 

 

उपाय… दो 

अगर घर में छोटी कन्या न हो तो घर में बने मंदिर अर्थात जहाँ भी आपने पूजा का स्थान बनाया हो में मां दुर्गा की पूजा करके उन्हें विभिन्न प्रकार के भोग लगाएं और माता को भेंट सामग्री अर्पित करें। प्रसाद का कुछ हिस्सा माता का ध्यान करते हुए गाय को खिला दें। माता के प्रसाद को सभी लोगों को ग्रहण करना चाहिए।

 

 

उपाय…. तीन 

आचार्य बताते हैं कि ऐसी परिस्थिति में एक उपाय ऐसे भी कर सकते हैं कि माँ कि पूजा अर्चना के बाद जिस कन्याओं का ध्यान कर सूखे नारियल, मखाना, मूंगफली, मिश्री आदि को प्रसाद स्वरुप बना लें और कुछ दक्षिणा भी रख दें और इसका पैकेट तैयार कर माँ के पूजा स्थल के पास ही रख दें चुंकि ये प्रसाद काफ़ी समय तक ख़राब होने वाला नहीं, इसलिए ज़ब स्थिति सामान्य हो जाएगी इसे कन्याओं को टीका लगाकर दान कर दें और कन्याओं से आशीर्वाद लें।

 

 

  • 2 से 10 वर्ष कि कन्या पूजन से ये मिलते हैं लाभ। 
  • दो वर्ष की कन्या का पूजन करने से घर में दुख और दरिद्रता नहीं आती।
  • 3 तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति का रूप मानी गई हैं। त्रिमूर्ति के पूजन से घर में धन-धान्‍य की भरमार रहती है वहीं परिवार में सुख और समृद्धि जरूर रहती है।
  • चार साल की कन्या को कल्याणी माना गया है। इनकी पूजा से परिवार का कल्याण होता है। 
  • पांच वर्ष की कन्या रोहिणी होती हैं। रोहिणी का पूजन करने से व्यक्ति रोगमुक्त रहता है।
  • छह साल की कन्या को कालिका रूप माना गया है। कालिका रूप से विजय, विद्या और राजयोग मिलता है। 
  • 7 साल की कन्या चंडिका होती है। चंडिका रूप को पूजने से घर में ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  • 8 वर्ष की कन्याएं शाम्‍भवी कहलाती हैं। इनको पूजने से सभी तरह के विवाद चाहें वह कानूनी ही हो, में विजयी मिलती है। 
  • 9 साल की कन्याएं दुर्गा का रूप होती हैं। इनका पूजन करने से शत्रुओं का नाश हो जाता है और असाध्य कार्य भी पूरे हो जाते हैं।
  • दस साल की कन्या सुभद्रा कहलाती हैं। सुभद्रा अपने भक्तों के सारे मनोरथ पूरा करती हैं।