• प्रोजेक्टर व टेबलेट से पढ़ाएंगे अध्यापक
  • पहले चरण में 4500 विद्यालयों से शुरुआत
  • ज्ञानवर्धक पुस्तकों की लाइब्रेरी भी बनेगी
  • बजट मिलते ही शुरू हो जाएगा इस पर काम

Archana S Shukla

(लखनऊ/VMN) अब वह दिन दूर नहीं जब परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राएं स्मार्ट क्लास में और अध्यापक टैबलेट से पढ़ाई कराते नजर आए। प्रदेश के परिषदीय विद्यालय को अब हाईटेक बनाने की तैयारी प्रदेश सरकार ने शुरू कर दी है। इसके लिए प्रदेश सरकार अपने पहले चरण में लगभग  4500 विद्यालयों में इन व्यवस्थाओं को लागू करेगी।

              हम भी स्मार्ट क्लास में पढ़ाई करते हैं यह कहते परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राएं सुनाई देंगे। उनके सपनों के उड़ान को पंख देने का काम अब यह स्मार्ट क्लास (प्रोजेक्टर युक्त) और टेबलेट करेंगे। देश में चल रहे डिजिटलीकरण के चलते परिषदीय विद्यालयों को भी हाईटेक किए जाने की प्रदेश सरकार ने तैयारी कर ली है। इसके साथ ही विद्यालयों में लाइब्रेरी भी तैयार की जाएगी जिसमें  विभिन्न प्रकार के कोर्स और ज्ञानवर्धक पुस्तकों का संग्रह मिलेगा। इस लाइब्रेरी में प्रमुखतया महापुरुषों पर लिखी गई पुस्तकें भी रखी जाएंगी वही स्पोर्ट्स व व्यायाम के बारे में जानकारी देने के लिए पुस्तकों का संग्रह संकलित किया जाएगा। इन सभी व्यवस्थाओं की देख देख विद्यालय के प्रिंसिपल और अध्यापकों के ऊपर होगी। परिषदीय विद्यालयों की कक्षाओं को स्मार्ट बनाने के लिए प्रोजेक्टर लगाए जाएंगे जिन पर छात्र छात्राओं को बेहतरीन तरीके से शिक्षा प्रदान की जाएगी। इससे जहां वह निजी स्कूलों के छात्र छात्राओं की भांति तकनीकी रूप से शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। 

“परिषदीय विद्यालयों का भी प्रदेश सरकार डिजिटलीकरण करने जा रही है। प्रदेश के  परिषदीय विद्यालयों में प्रोजेक्टर लगाए जाने की तैयारी की जा रही है जिससे छात्र-छात्राएं बेहतर तरीके से शिक्षित किए जा सकेंगे इसके साथी अध्यापकों को टेबलेट प्रदान किए जाएंगे जिससे वह छात्र छात्राओं को आधुनिक तरीके से शिक्षित कर सकेंगे। प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया अभियान में यह महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। छात्र-छात्राएं प्रारंभ से ही इस नई तकनीकी से जुड़ेंगे और हाईटेक बनेंगे। शासन से बजट मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। पहले चरण में प्रदेश के लगभग 4500 परिषदीय विद्यालयों  में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। स्मार्ट क्लास जूनियर स्कूल के साथ ही कस्तूरबा गांधी स्कूल में भी बनाए जाएंगे। इस योजना तहत प्रदेश के मिर्जापुर, बहराइच समेत उन 25 जिलों को लिया गया है जो पिछड़े हैं।” (विजय किरण आनंद, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा उत्तर प्रदेश)