कानपुर. उत्तर प्रदेश पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया है। जिले के नौबस्ता थानाक्षेत्र में 10 दिन पहले एक 16 साल की लड़की का अपहरण हो गया था। नाबालिग के परिजन लगातार 10 दिनों से थाने से चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन आरोप है कि इस घटना की जांच कर रहे दरोगा सतीश चंद्र यादव ने पीड़िता के परिजनों से 20 हजार रुपए रिश्वत की मांग की। इसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से किए जाने के बाद पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

परिजनों का आरोप है कि जब 20 हजार रुपए देने में असमर्थता जताई तो दरोगा ने कहा कि पैसे नहीं है तो क्यों एफआईआर दर्ज करायी थी। जब पड़िता ने उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई तो दरोगा के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।

नौबस्ता थाना क्षेत्र के दलहनपुर में रहने वाले लोडर चालक पत्नी और बेटी के साथ रहते हैं। परिजनों का आरोप है कि मोहल्ले में रहने वाले अन्नू ठाकुर , कल्लू ठाकुर, अमित सिंह, शिवप्रसाद जादव ने बेटी का अपहरण किया है। 17 नवबंर को नौबस्ता थाने में बेटी के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था।

नाबालिग के पिता ने बताया कि 16 नवंबर की रात से बेटी लापता है। अगले दिन मुकदमा दर्ज कराया और इसके बाद से लगातार थाने के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पुलिस ने बेटी को ढूढ़ने का प्रयास नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि आने जाने में बच्ची को ढूढने में 15 से 20 हजार रुपए खर्च हो गए।

पीड़िता के पिता ने दरोगा से कहा कि मेरे पास इतना पैसा नहीं है। मैं हजार दो हजार रुपए दे सकता हूं। गरीब आदमी हैं। हम लोग इतना पैसा दे नहीं पाएगें। मुझे लग रहा है जो लोग बेटी को ले गए हैं वो दबंग लोग हैं। इसीलिए पुलिस कार्यवाई नहीं कर रही है। बेटी के साथ साथ अनहोनी होने की आशंका है।

सीओ आलोक सिंह के मुताबिक थाना नौबस्ता क्षेत्र में एक शिकायत मिली है कि एक विवेचक के द्धारा अपहर्ता के पिता से पैसे मांगें गए हैं। इसकी जांच की जा रही है।