- रामलला के मस्तक पर पड़ीं सूर्य की किरणें
- आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम दिखा
अयोध्या(VMN)। (विशेष संवाददाता) पावन नगरी अयोध्या में राम नवमी के अवसर पर इस वर्ष भी आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम देखने को मिला। राम मंदिर में विराजमान रामलला के मस्तक पर ठीक निर्धारित समय पर सूर्य की किरणों से ‘सूर्य तिलक’ किया गया।
दोपहर के शुभ मुहूर्त में जैसे ही सूर्य की सीधी किरणें विशेष तकनीकी व्यवस्था के माध्यम से गर्भगृह तक पहुंचीं, रामलला के मस्तक पर प्रकाश का दिव्य तिलक उभर आया। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे, जबकि देश-विदेश में करोड़ों लोगों ने इसका सीधा प्रसारण देखा।
इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम ने महीनों तक तैयारी की थी। विशेष दर्पण और लेंस प्रणाली के जरिए सूर्य की किरणों को इस प्रकार निर्देशित किया गया कि वे कुछ मिनटों तक सीधे रामलला के ललाट पर केंद्रित रहें। यह प्रक्रिया पूरी तरह खगोलीय गणना और आधुनिक तकनीक पर आधारित रही।
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, ‘सूर्य तिलक’ परंपरा का उद्देश्य भगवान राम को सूर्यवंशी होने का प्रतीकात्मक सम्मान देना है। इस मौके पर पूरे मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत क्षण को ‘दिव्य और अलौकिक अनुभव’ बताते हुए कहा कि यह दृश्य जीवनभर याद रहने वाला है। सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।
राम नवमी के इस विशेष अवसर पर अयोध्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भगवान राम के प्रति लोगों की आस्था अटूट और अमिट है।



