कल्याणपुर (कानपुर)/VMN। शहर में अवैध किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट के बड़े रैकेट का सोमवार को खुलासा हुआ। डीसीपी वेस्ट की क्राइम ब्रांच और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए एक डॉक्टर दंपति और एक दलाल को हिरासत में लिया है।
जांच में सामने आया कि गिरोह 8 से 10 लाख रुपये में डोनर तैयार करता था, जबकि मरीजों से किडनी व लिवर ट्रांसप्लांट के लिए 80 लाख रुपये तक वसूले जाते थे। ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली और लखनऊ से डॉक्टरों की टीम बुलाई जाती थी। ऑपरेशन के बाद डोनर और रिसीवर को कल्याणपुर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता था।
टीम ने सबसे पहले केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में छापा मारा, जहां किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रिया अस्पताल में छापेमारी की गई, जहां महिला रिसीवर भर्ती मिली। वहीं पनकी रोड स्थित मेडलाइफ अस्पताल से डोनर को बरामद किया गया।
पूछताछ में खुलीं कई परतें
डॉक्टर दंपति से पूछताछ में पूरे रैकेट का खुलासा होने लगा। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था। बिहार के समस्तीपुर निवासी डोनर आयुष और महिला रिसीवर पारुल तोमर को भी पुलिस सुरक्षा में लिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, डोनर को करीब साढ़े तीन लाख रुपये ऑनलाइन और छह लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि रिसीवर से 80 लाख रुपये तक वसूले गए। आयुष ने पहले पारुल को अपनी बहन बताया, लेकिन बाद में पैसे लेकर किडनी देने की बात स्वीकार कर ली।
छोटी सूचना से हुआ बड़ा खुलासा
पुलिस को मामूली इनपुट मिला था कि बाहरी लोगों को जांच के बहाने सर्जरी के लिए फंसाया जा रहा है। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने ऑपरेशन चलाकर पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किया।
डोनर की हालत गंभीर, इलाज पर सवाल
डोनर आयुष की हालत खराब बताई जा रही है। उसे मेडलाइफ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखे। सोमवार रात वह दर्द से तड़पता रहा, लेकिन उसे बेहतर इलाज के लिए शिफ्ट नहीं किया गया।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह अवैध कारोबार वेस्ट यूपी, बिहार और बंगाल तक फैला हुआ है। पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी है।
ACMO बोले
“किडनी ट्रांसप्लांट के अवैध धंधे की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग के साथ आहूजा, प्रिया और मेडलाइफ अस्पताल में जांच की गई है। मामले की पड़ताल जारी है।” — डॉ. रमित रस्तोगी



