नई दिल्ली (VMN)I मैं सदन के माध्यम से देश को ये विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मोदी सरकार आपके साथ खड़ी है हम आपको अपराधी नहीं बल्कि देश का भाग्य विधाता मानते हैं। यह बात संसद में अपना पक्ष रखते हुए कानपुर लोकसभा सांसद रमेश अवस्थी ने कही।
उन्होंने कहा कि विश्वास से ही विकास है और जन विश्वास से ही भारत का उज्जवल भविष्य है अंत में उन्होंने कहा कि विपक्ष के जो हमारे साथी मा०प्रधानमंत्री पर अपनी शायरी के माध्यम से कटाक्ष करते रहते हैं मैं उनको जरूर कहना चाहता हूं कि उनकी सोच सिर्फ विरोध करने की हो गई है। विरोध का उनको फोबिया हो गया है तो उनके इन्हीं कुतर्कों का और शायरी का जवाब अपने दो पंक्तियों में देकर अपनी बात समाप्त करना चाहता हूं।
(सौजन्य से संसद टीवी)
“चमकता है जो सूरज बनकर वो अंधेरों से नहीं डरता। जिसे हो देश की फिक्र वो चुनौतियों से नहीं डरता।”
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जन विश्वास बिल 2, सशक्त भारत की आधारशिला है।
क्या है जन विश्वास बिल
वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद द्वारा जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में प्रस्तुत किया गया।
23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित 79 केंद्रीय अधिनियमों के 784 प्रावधानों में संशोधन के लिए प्रस्तावित विधेयक में व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने के लिए 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और जीवन यापन में आसानी लाने के लिए 67 संशोधनों का प्रावधान है।
यह विधेयक व्यापार करने में आसानी और जीवन जीने में आसानी को बढ़ावा देने के साथ-साथ विश्वास और आनुपातिक विनियमन पर आधारित शासन ढांचे को आगे बढ़ाने के सरकार के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
विधेयक में निम्नलिखित प्रस्ताव हैं:
- 23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित 79 केंद्रीय अधिनियमों के 784 प्रावधानों में संशोधन।
- व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने के लिए धारा 717 के प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना।
- जीवनयापन को सुगम बनाने के लिए 67 प्रावधानों में संशोधन
- इस विधेयक का उद्देश्य 1000 से अधिक अपराधों को तर्कसंगत बनाना
- अप्रचलित और अनावश्यक प्रावधानों को हटाना और इस प्रकार समग्र नियामक वातावरण में सुधार करना है।
- इस विधेयक में मामूली, तकनीकी या प्रक्रियात्मक चूक के लिए आपराधिक दंड के बजाय नागरिक और प्रशासनिक प्रवर्तन तंत्रों की ओर बदलाव का प्रावधान है।
प्रमुख उपायों में शामिल हैं:
- कारावास के प्रावधानों को आर्थिक दंड या चेतावनी से प्रतिस्थापित करना
- श्रेणीबद्ध प्रवर्तन तंत्र, जिसमें पहली बार उल्लंघन करने पर चेतावनी देना भी शामिल है।
- अपराध की प्रकृति के अनुपात में जुर्माने और दंडों का युक्तिकरण।
कुशल और समयबद्ध प्रवर्तन सुनिश्चित करने के लिए, विधेयक में निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:
- निर्णय अधिकारियों की नियुक्ति
- अपीलीय प्राधिकरणों की स्थापना
- इन उपायों का उद्देश्य मामलों का शीघ्र निपटान करना
- अदालतों पर मुकदमेबाजी का बोझ कम करना है
- प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करना है।
67 संशोधनों का भी प्रस्ताव है:
- नई दिल्ली नगर परिषद अधिनियम, 1994
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988
इन संशोधनों का उद्देश्य नगरपालिका कराधान और वाहन संबंधी अनुपालन जैसे क्षेत्रों में प्रक्रियाओं को सरल बनाना और नागरिकों की सुविधा को बढ़ाना है।
परामर्शात्मक दृष्टिकोण
प्रस्तावित सुधार एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया पर आधारित हैं जिसमें अंतर-मंत्रालयी समिति की बैठकें, नीति आयोग के तहत उच्च स्तरीय समिति की बैठकें, उद्योग संघों और नागरिक समाज संगठनों के साथ बातचीत शामिल है। इसके अतिरिक्त, जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2025 पर गठित चयन समिति ने समिति के सदस्यों, भाग लेने वाले मंत्रालयों, बाहरी हितधारकों और विषय-वस्तु विशेषज्ञों के साथ 49 बैठकों वाली एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया का संचालन किया।
विश्वास-आधारित शासन
यह विधेयक सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत वह एक विश्वास-आधारित कानूनी और अनुपालन वातावरण को बढ़ावा देगी, जहां नागरिकों और व्यवसायों को मामूली उल्लंघन के लिए आपराधिक दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा। आपराधिक दायित्व के बोझ को कम करके और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, इस विधेयक से अनुपालन में सुधार, निवेश को बढ़ावा और आर्थिक विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वर्तमान विधेयक लघु अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की सुधार पहल पर आधारित है। इस पहल की शुरुआत जन विश्वास अधिनियम, 2023 से हुई थी, जिसने 19 मंत्रालयों/विभागों द्वारा प्रशासित 42 केंद्रीय अधिनियमों के 183 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। इसी क्रम में, जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 को 18 अगस्त, 2025 को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था। 2025 के विधेयक में 10 मंत्रालयों/विभागों द्वारा प्रशासित 16 केंद्रीय अधिनियमों के 355 प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावित किए गए थे और इसे एक चयन समिति को भेजा गया था।
श्री तेजस्वी सूर्या की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने 49 बैठकें कीं और 13 मार्च 2026 को लोकसभा को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। समिति ने व्यापक परामर्श किया और विचाराधीन प्रावधानों के अलावा, उन्हीं अधिनियमों के भीतर अन्य प्रावधानों की भी जांच की और 62 अतिरिक्त केंद्रीय अधिनियमों में अपराध को गैर-आपराधिक बनाने की सिफारिश की। इसके बाद जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 को वापस ले लिया गया और जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया।
जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 भारत के नियामक ढांचे के आधुनिकीकरण और इसे वैश्विक स्तर पर स्वीकृत आनुपातिक एवं जोखिम-आधारित विनियमन के सिद्धांतों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस विधेयक से देश में व्यापार करने और जीवनयापन करने में सुगमता लाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।



