- राघव चड्ढा को लेकर पार्टी में बवाल
- संसद में बोलने पर रोक लगाने का आरोप
- पार्टी लाइन से अलग चलने का आरोप
- भाजपा से नजदीकियों को लेकर चर्चा
नई दिल्ली/VMN(RAJAT SAXENA)। आम आदमी पार्टी (आप) ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया है। उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब पार्टी के भीतर चड्ढा और शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेदों की चर्चा लंबे समय से चल रही थी।
पार्टी ने इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेजकर बदलाव की जानकारी दे दी है। राज्यसभा में आप के नेता संजय सिंह ने कहा कि यह एक सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया है, जबकि पार्टी ने इस बात से इनकार किया कि चड्ढा को सदन में बोलने से रोका जा रहा था।अंदरूनी मतभेदों को मिला संकेत
इस फैसले को दिल्ली की राजनीति में चल रही ‘खामोश कलह’ का खुला संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि चड्ढा की अलग राजनीतिक लाइन और नेतृत्व से दूरी बनाने की धारणा ने पार्टी नेतृत्व को असहज किया।
हालिया घटनाओं ने बढ़ाई दूरी
पिछले कुछ महीनों में कई घटनाओं ने इस दूरी को और स्पष्ट किया। फरवरी के अंत में कथित शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं को राहत मिलने पर जहां पार्टी में उत्साह का माहौल था, वहीं चड्ढा की चुप्पी ने सवाल खड़े किए। इस पर पूछे जाने पर संजय सिंह ने टिप्पणी से बचते हुए कहा कि इसका जवाब चड्ढा ही दे सकते हैं।
धीरे-धीरे मुख्यधारा से दूरी
एक समय केजरीवाल के करीबी रणनीतिकार माने जाने वाले चड्ढा बीते कुछ समय से पार्टी की मुख्यधारा से अलग नजर आ रहे थे। सूत्रों के अनुसार, उनके रुख और सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर नेतृत्व में असंतोष बढ़ रहा था, जो अंततः इस फैसले के रूप में सामने आया। ऐसी भी चर्चा है कि राघव का भाजपा से अंदरुनी मेलजोल ज्यादा बढ़ता जा रहा है।
असहजता की प्रमुख वजहें
- पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने की धारणा
- महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्वजनिक चुप्पी
- संगठनात्मक गतिविधियों में सीमित भागीदारी
- नेतृत्व से बढ़ती दूरी की चर्चा
यह घटनाक्रम संकेत देता है कि आप के भीतर संगठनात्मक संतुलन और नेतृत्व नियंत्रण को लेकर पुनर्संरचना जारी है, जिसके असर आने वाले समय में और स्पष्ट हो सकते हैं।



