- उपभोक्ताओं को मिलेगी विकल्प की सुविधा
नई दिल्ली/VMN( संवाद सूत्र)। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने स्पष्ट किया है कि बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं है। यह पूरी तरह एक वैकल्पिक व्यवस्था है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं और बिजली वितरण कंपनियों—दोनों को लाभ मिलता है।
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान मंत्री ने उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि स्मार्ट मीटर जबरन लगाए जा रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई उपभोक्ता प्रीपेड स्मार्ट मीटर नहीं लगवाना चाहता, तो उसे इसके लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
कंपनियों के घाटे में कमी
मंत्री ने बताया कि जिन क्षेत्रों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां बिजली वितरण कंपनियों के घाटे में कमी आई है और कई कंपनियां मुनाफे में पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि बिजली वितरण कंपनियां व्यावसायिक संस्थाएं हैं, जो सेवा के साथ-साथ आर्थिक संतुलन भी देखती हैं।
रिचार्ज सिस्टम से मिलेगी सुविधा प्रीपेड स्मार्ट मीटर में उपभोक्ताओं को मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज कराना होता है। रिचार्ज खत्म होने पर बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो जाती है, जिससे अनावश्यक बकाया की समस्या नहीं रहती।
क्या है स्मार्ट मीटर?
स्मार्ट मीटर एक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो बिजली खपत का रियल-टाइम डेटा रिकॉर्ड करता है। उपभोक्ता इसकी जानकारी मोबाइल ऐप या एसएमएस के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। यह मीटर प्रीपेड और पोस्टपेड—दोनों मोड में काम करने में सक्षम है, जिससे पारदर्शिता और सुविधा बढ़ती है।



