- IIT कानपुर में नवंबर से शुरू होगा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल
- गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बाहर की दौड़ होगी कम
कानपुर/VMN(RAJAT SAXENA)। हर परिवार की जिंदगी में एक ऐसा पल आता है, जिससे वह कभी दोबारा रूबरू नहीं होना चाहता। अस्पताल के बाहर बेचैन खड़े परिजन… अंदर जिंदगी के लिए संघर्ष करता मरीज… और डॉक्टर के मुंह से निकले कुछ शब्द—“मरीज की हालत गंभीर है… इसे तुरंत बाहर ले जाइए।”
इन शब्दों के साथ ही शुरू होती है एक ऐसी दौड़, जिसमें समय भी दुश्मन बन जाता है और दूरी भी। कोई दिल्ली की ओर भागता है, कोई लखनऊ की ओर। कोई एंबुलेंस खोजता है तो कोई इलाज के लिए पैसों का इंतजाम। कई बार यह सफर मरीज से ज्यादा पूरे परिवार को तोड़ देता है।
लेकिन अब लगता है कि यह दर्दभरी कहानी धीरे-धीरे बदलने वाली है।
कानपुर में एक ऐसी सौगात दस्तक देने जा रही है, जो सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि लाखों लोगों की उम्मीदों का नया पता बन सकती है। IIT कानपुर परिसर में बन रहा यदुपति सिंघानिया सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल नवंबर से शुरू होने की तैयारी में है। इसके शुरू होने के बाद गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे शहरों की ओर होने वाली भागदौड़ में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।

पहले चरण में 500 बेड वाले इस अत्याधुनिक अस्पताल में हृदय रोग, कार्डियोवैस्कुलर एवं थोरासिक सर्जरी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, किडनी रोग, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी जैसी सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही आधुनिक ट्रॉमा सेंटर भी बनाया गया है, जहां सड़क दुर्घटनाओं और अन्य गंभीर मामलों में मरीजों को समय पर जीवनरक्षक उपचार मिल सकेगा।
इस अस्पताल की खासियत केवल आधुनिक मशीनें नहीं होंगी, बल्कि यहां चिकित्सा अनुसंधान और नई तकनीकों पर भी काम किया जाएगा। देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के साथ-साथ यूरोप और ब्रिटेन के विजिटिंग प्रोफेसर भी संस्थान से जुड़े रहेंगे, जिससे मरीजों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं अपने ही शहर में मिल सकेंगी।

संस्थान के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल के अनुसार अस्पताल को नवंबर में शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के अंतर्गत विकसित इस परियोजना में पूर्व छात्र राकेश गंगवाल ने 100 करोड़ रुपये तथा यदुपति सिंघानिया परिवार ने अस्पताल निर्माण के लिए 60 करोड़ रुपये का योगदान दिया है।
यह सिर्फ अस्पताल नहीं, भरोसे की वापसी है
यह खबर केवल एक नई इमारत के उद्घाटन की सूचना नहीं है। यह उन हजारों परिवारों के लिए राहत की आहट है, जो वर्षों से गंभीर बीमारी का मतलब शहर छोड़ना, भारी खर्च उठाना और अपनों की जिंदगी को समय के भरोसे छोड़ देना समझते रहे हैं।
यदि सब कुछ तय समय के अनुसार हुआ, तो नवंबर के बाद कानपुर की पहचान केवल शिक्षा और उद्योग के शहर के रूप में नहीं होगी, बल्कि वह उन शहरों में भी गिना जाएगा, जहां लोग इलाज के लिए आएंगे—न कि इलाज के लिए यहां से जाएंगे।
शायद तभी पहली बार किसी डॉक्टर के मुंह से
“बाहर ले जाइए” की जगह यह सुनाई देगा—”यहीं इलाज हो जाएगा।”



