- सांसद रमेश अवस्थी ने पेश किया ‘राष्ट्रीय ध्वज गीत विधेयक 2026
- विधेयक संख्या 152 में ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ को राष्ट्रीय ध्वज गीत बनाने का प्रस्ताव
- पद्मश्री श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ के इस गीत को मिला सम्मान
कानपुर/नई दिल्ली(RAJAT SAXENA)। “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा…”
देश की आजादी की लड़ाई के दौर में जन-जन के भीतर राष्ट्रभक्ति की अलख जगाने वाली ये अमर पंक्तियां अब संसद के आधिकारिक विधायी दस्तावेज का हिस्सा बन गई हैं।
कानपुर लोकसभा सांसद रमेश अवस्थी ने संसद में ‘राष्ट्रीय ध्वज गीत विधेयक, 2026’ प्रस्तुत किया है। सांसद द्वारा प्रस्तुत इस प्राइवेट मेंबर बिल का आधिकारिक दस्तावेज ‘2026 का विधेयक संख्या 152’ है।
यह पहल कानपुर के लिए इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि जिस अमर रचना को राष्ट्रीय ध्वज गीत का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा गया है, उसके रचयिता पद्मश्री श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ कानपुर से संबंध रहा है।
अब सिर्फ भावनाओं में नहीं, संसद के दस्तावेज में भी तिरंगे का गीत
सांसद रमेश अवस्थी द्वारा प्रस्तुत विधेयक का उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय ध्वज के प्रति गहन राष्ट्रीय सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करना, ऐतिहासिक एवं देशभक्तिपूर्ण रचना “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा” को भारत के राष्ट्रीय ध्वज गीत के रूप में अंगीकार करना तथा समारोहों के अवसर पर इसके गरिमापूर्ण एवं एकरूप गायन को सुनिश्चित करना है।
विधेयक के आधिकारिक दस्तावेज में प्रस्तावित कानून का नाम ‘राष्ट्रीय ध्वज गीत अधिनियम, 2026’ रखा गया है। इसमें इसके पूरे भारत में विस्तार तथा केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना जारी किए जाने के बाद लागू होने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
यानी यह पहल महज किसी मांग या सार्वजनिक अपील तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बाकायदा संसदीय विधायी प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
कानपुर की धरती पर रचा गया था अमर ध्वज गीत श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ का नाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और तिरंगे के सम्मान की भावना से जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार उन्होंने 1924 में कानपुर के फूलबाग में इस अमर ध्वज गीत की रचना की थी।
“विजयी विश्व तिरंगा प्यारा…” देखते ही देखते स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रभक्ति का जनगीत बन गया।इसकी पंक्तियों में तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, स्वाभिमान, त्याग और भारत की सामूहिक चेतना का प्रतीक बनकर सामने आता है।
यही वजह है कि आज भी राष्ट्रीय पर्वों और तिरंगा यात्राओं में इस गीत की गूंज लोगों को सहज रूप से देशभक्ति के भाव से जोड़ देती है।
राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ राष्ट्रीय ध्वज गीत की परिकल्पना प्रस्तावित विधेयक का एक महत्वपूर्ण पक्ष राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा को और व्यापक बनाने से जुड़ा है।
भारत के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का अपना विशिष्ट राष्ट्रीय महत्व है। वहीं प्रस्तावित राष्ट्रीय ध्वज गीत तिरंगे के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय संकल्प की अभिव्यक्ति के रूप में एक अलग स्थान स्थापित करने की दिशा में कदम है।
विधेयक में समारोहों के अवसर पर गीत के गरिमापूर्ण और एकरूप गायन को सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इससे भविष्य में यदि विधेयक विधायी प्रक्रिया में आगे बढ़ता है तो राष्ट्रीय समारोहों और शैक्षणिक संस्थानों में इसके गायन के लिए एक निर्धारित प्रोटोकॉल विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
कानपुर के गौरव को राष्ट्रीय मंच पर मिला नया आयाम
कानपुर का इतिहास केवल औद्योगिक नगरी के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमि के रूप में भी दर्ज है। गणेश शंकर विद्यार्थी की पत्रकारिता, स्वतंत्रता आंदोलन की गतिविधियां और अनेक राष्ट्रभक्तों की कर्मभूमि रहे कानपुर ने देश की राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
इसी शहर की धरती से जुड़े श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ के अमर गीत को राष्ट्रीय ध्वज गीत का दर्जा दिलाने की पहल अब संसद तक पहुंचना कानपुर के लिए गौरव का विषय है।
यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि जिस कानपुर की मिट्टी ने तिरंगे के सम्मान को स्वर दिया, उसी कानपुर के सांसद ने उस स्वर को राष्ट्रीय विधायी पहचान दिलाने का प्रयास संसद में रखा है।
युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़ने का माध्यम
आज के दौर में जब नई पीढ़ी स्वतंत्रता आंदोलन की अनेक घटनाओं से दूर होती जा रही है, ऐसे गीत इतिहास और वर्तमान के बीच सेतु का काम करते हैं।
यदि प्रस्तावित विधेयक कानून का रूप लेता है तो स्कूलों, कॉलेजों और राष्ट्रीय समारोहों में इस गीत के निर्धारित और गरिमापूर्ण गायन से बच्चों और युवाओं को इसके इतिहास से परिचित कराने का अवसर मिलेगा।
तिरंगे के सामने सामूहिक स्वर में जब नई पीढ़ी गाएगी—
“विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा…”
तो वह केवल गीत का गायन नहीं होगा, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और राष्ट्रध्वज के सम्मान के संकल्प का पुनर्स्मरण भी होगा।

विधेयक संख्या 152 ने दर्ज किया नया अध्याय
संसद के आधिकारिक दस्तावेज में ‘राष्ट्रीय ध्वज गीत विधेयक, 2026’ को विधेयक संख्या 152 के रूप में दर्ज किया जाना इस पहल को विशेष महत्व देता है।
किसी ऐतिहासिक और राष्ट्रीय विषय को विधेयक के रूप में संसद के पटल तक पहुंचाना अपने आप में महत्वपूर्ण कदम है।
कानपुर से उठी आवाज, देश के तिरंगे के सम्मान के लिए
सांसद रमेश अवस्थी की इस पहल को कानपुर की ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रीय भावना के संगम के रूप में देखा जा सकता है।
एक ओर यह श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ की अमर रचना को सम्मान देने का प्रयास है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना को संस्थागत स्वरूप देने की पहल।
कानपुर की धरती से निकली वह आवाज, जिसने कभी स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानियों में जोश भरा था, आज संसद के विधायी दस्तावेज में दर्ज हो चुकी है।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं कि गीत कितना लोकप्रिय है— महत्वपूर्ण यह भी है कि तिरंगे के इस अमर गीत को भारत के आधिकारिक ‘राष्ट्रीय ध्वज गीत’ की पहचान दिलाने के लिए पहला कदम संसद में पहुंच चुका है।
🇮🇳“विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा।” 🇮🇳



