Sunday, May 17, 2026
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    कानपुर में किडनी कांड में डॉक्टर दंपति समेत 6 आरोपी जेल भेजे गए

    कानपुर (VMN)। किडनी की खरीद-फरोख्त और अवैध ट्रांसप्लांट के बड़े रैकेट का खुलासा करते हुए पुलिस ने आईएमए उपाध्यक्ष एवं आहूजा अस्पताल की संचालिका डॉ. प्रीति आहूजा सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार लोगों में उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, मेडलाइफ हॉस्पिटल के संचालक राजेश कुमार और राम प्रकाश कुशवाहा, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह तथा एजेंट शिवम अग्रवाल शामिल हैं।
    पुलिस के अनुसार, इस मामले में 10 नामजद और 5 अज्ञात समेत कुल 15 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। वहीं, चार डॉक्टर—डॉ. रोहित उर्फ राहुल, डॉ. वैभव, डॉ. अनुराग और डॉ. अफजल—अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।टेलीग्राम के जरिए चलता था रैकेट
    पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि यह पूरा सिंडिकेट एक टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से संचालित हो रहा था। मरीजों और डोनर की तलाश यहीं से की जाती थी। मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर, जो पिछले आठ वर्षों से डायलिसिस पर थीं, के लिए इसी ग्रुप पर किडनी की मांग रखी गई थी।
    छह लाख में हुआ डोनर का सौदा, 80 लाख तक वसूली
    जांच में सामने आया कि बिहार के समस्तीपुर निवासी आयुष, जो देहरादून में एमबीए का छात्र है, से छह लाख रुपये में किडनी का सौदा किया गया। इसमें से साढ़े तीन लाख रुपये यूपीआई के माध्यम से उसके खाते में भेजे गए। वहीं, मरीज पारुल तोमर से करीब 80 लाख रुपये वसूले गए।
    ऑपरेशन के बाद अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती
    रविवार रात केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में ट्रांसप्लांट के बाद दोनों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, ताकि मामला छिपाया जा सके। आयुष को मेडलाइफ अस्पताल और पारुल को प्रिया अस्पताल में भर्ती किया गया। पारुल की हालत गंभीर बताई जा रही है।रकम का ऐसे हुआ बंटवारा
    ट्रांसप्लांट के बाद एजेंट शिवम अग्रवाल को सात लाख रुपये दिए गए। उसने 3.50 लाख रुपये आयुष के खाते में ट्रांसफर किए, 2.75 लाख आहूजा अस्पताल को दिए, 25 हजार मेडलाइफ अस्पताल को दिए और 50 हजार अपने पास रखे।
    छापेमारी जारी, कई और खुलासों की उम्मीद
    पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार छापेमारी कर रही है। अब तक 1.75 लाख रुपये नकद और भारी मात्रा में दवाइयां बरामद की गई हैं। जांच में सामने आया है कि इसी अस्पताल में हाल के दिनों में आठ ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। ऑपरेशन के लिए बाहरी डॉक्टरों की टीम बुलाई जाती थी, जो ऑपरेशन के बाद लौट जाती थी।
    किडनी ट्रांसप्लांट के नियम
    मानव अंगों की तस्करी रोकने के लिए कानून में सख्त प्रावधान हैं। ट्रांसप्लांट ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यू एक्ट के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

    • किडनी दान में माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी और संतान को प्राथमिकता
    • डोनर और मरीज का ब्लड व टिश्यू मैच अनिवार्य
    • अधिकृत समिति की अनुमति जरूरी दान स्वेच्छा से होना चाहिए, आर्थिक लेन-देन वर्जित

    पति-पत्नी के मामले में वैध विवाह प्रमाण देना अनिवार्य
    जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. समीर गोविल के अनुसार, सभी दस्तावेजों और संबंधों की गहन जांच के बाद ही ट्रांसप्लांट की अनुमति दी जाती है।
    पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा कि यह नेटवर्क नोएडा से लेकर लखनऊ तक फैला हुआ है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

    एंबुलेंस चालक निकला मास्टरमाइंड
    तीन मार्च को पुलिस को शहर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की प्रारंभिक सूचना मिली थी, लेकिन सटीक जानकारी के अभाव में तत्काल छापेमारी नहीं की जा सकी। रविवार रात ट्रांसप्लांट किए जाने की पुष्टि होने पर सोमवार दोपहर रावतपुर थानाध्यक्ष कमलेश राय को सूचना मिली, जिसके बाद मामला तेजी से आगे बढ़ा।
    पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर डीसीपी पश्चिम जोन की क्राइम ब्रांच, रावतपुर पुलिस और सीएमओ की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने जांच और छापेमारी कर पूरे रैकेट का खुलासा किया।
    जांच में सामने आया कि इस अवैध नेटवर्क का मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल है, जो महज आठवीं पास एंबुलेंस चालक है। वह एप्रन और स्टेथोस्कोप पहनकर खुद को मेडिकल स्टाफ जैसा दिखाता था और मरीजों व डोनर को झांसे में लेकर सौदे तय कराता था।

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