- 32 स्वास्थ्यकर्मी गायब, फर्जी हाजिरी का खेल उजागर
- मरीजों को बहका रहे दो संदिग्ध दबोचे गए
- डीएम ने मंगलवार उर्सला का किया औचक निरीक्षण
- सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की खुलीं परतें
कानपुर नगर/ VMN(RAJAT SAXENA)। सुबह करीब 9:30 बजे जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह अचानक यूएचएम जिला पुरुष चिकित्सालय पहुंचे तो अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। कई डॉक्टरों के कमरे खाली मिले, मरीज इलाज के इंतजार में भटकते दिखे और सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर होने के बावजूद कई डॉक्टर ड्यूटी से नदारद पाए गए।

निरीक्षण के दौरान कुल 22 डॉक्टर समेत 32 स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित मिले। डीएम ने तत्काल सख्त कार्रवाई करते हुए सभी का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं, मई महीने में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा उपस्थिति पंजिकाओं की एक बार भी जांच न किए जाने पर भी डीएम ने नाराजगी जताई।फर्जी हाजिरी: डॉक्टर गायब लेकिन रजिस्टर में साइन
सबसे बड़ा खुलासा सर्जन ओपीडी में हुआ, जहां डॉ. प्रशांत मिश्रा की ड्यूटी लगी थी। निरीक्षण के समय डॉक्टर मौजूद नहीं थे, लेकिन उपस्थिति पंजिका में उनके हस्ताक्षर दर्ज मिले। इस मामले को जिलाधिकारी ने बेहद गंभीर मानते हुए जांच रिपोर्ट तलब कर दी।
अस्थि रोग विभाग की ओपीडी का हाल भी बदहाल मिला। बाहर मरीजों की लंबी कतार थी लेकिन डॉक्टर गायब थे। बताया गया कि डॉ. एस.के. राजपूत की ड्यूटी थी, मगर वे अस्पताल पहुंचे ही नहीं। डीएम ने तत्काल वैकल्पिक डॉक्टर की व्यवस्था कराने के आदेश दिए।
बाल रोग विभाग में भी मरीज परेशान दिखे। यहां डॉ. राहुल वर्मा और डॉ. आर.सी. यादव अनुपस्थित पाए गए। डीएम ने साफ कहा कि “वरिष्ठ डॉक्टरों की लापरवाही सीधे गरीब मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है।”
मरीजों को गुमराह कर रहे दो संदिग्ध पकड़े गए
निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में दो संदिग्ध युवक भी पकड़े गए, जो मरीजों को बहकाते और इधर-उधर ले जाते मिले। पकड़े गए लोगों की पहचान नर्वल तहसील के महोली निवासी विवेक तिवारी और चमनगंज निवासी हैदर अली के रूप में हुई। डीएम ने सीएमएस को निर्देश दिए कि अस्पताल परिसर में सक्रिय ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रखी जाए ताकि दलाली और मरीजों को बहकाने का खेल बंद हो सके।
डीएम की दो टूक — “बाहरी दवा लिखी तो होगी कार्रवाई”
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने डॉक्टरों को सख्त चेतावनी दी कि मरीजों को किसी भी हालत में अनावश्यक बाहरी दवाएं न लिखी जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पताल में उपलब्ध दवाओं को प्राथमिकता दी जाए और जरूरत पड़ने पर जन औषधि केंद्र की सस्ती दवाएं लिखी जाएं।
इन डॉक्टरों और कर्मचारियों पर गिरी गाज
अनुपस्थित पाए गए चिकित्सकों में डॉ. राज किशोर, डॉ. ए.के. कनौजिया, डॉ. आर.सी. यादव, डॉ. अरुण प्रकाश, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. आर.के. अग्रवाल, डॉ. राजकुमार सिंह, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. विजय कुमार सिंह, डॉ. प्रीति मेहता और डॉ. महेश कुमार शामिल रहे।
इसके अलावा पैरामेडिकल स्टाफ और संविदा कर्मचारियों की लंबी सूची भी अनुपस्थित मिली, जिस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई।
डीएम बोले — अस्पताल में नहीं चलेगी लापरवाही
निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने साफ संदेश दिया कि सरकारी अस्पतालों में लापरवाही, फर्जी उपस्थिति और मरीजों के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।



