- बर्फीले तूफान में फंसे जवानों की मिलेगी लोकेशन
- कानपुर के वैज्ञानिकों की अनोखी है पहल
कानपुर/ VMN (RAJAT SAXENA)। भारतीय सेना के जवान जल्द ही ऐसी अत्याधुनिक ‘स्मार्ट वर्दी’ पहन सकते हैं, जो हिमस्खलन, बर्फीले तूफान या ग्लेशियर में दब जाने की स्थिति में उनकी सटीक लोकेशन रेस्क्यू टीम तक पहुंचाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर DRDO की कानपुर स्थित डिफेंस मैटेरियल्स एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (DRMSRDE) और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी संस्थान (UPTTE) संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं।
स्मार्ट वर्दी में जीपीएस मॉड्यूल, कंडक्टिव फैब्रिक, विशेष इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और अत्याधुनिक सेंसर लगाए जाएंगे। ये सभी तकनीक कपड़े के भीतर ही समाहित रहेंगी, जिससे सैनिक को कोई अतिरिक्त उपकरण साथ नहीं रखना पड़ेगा। यदि कोई जवान बर्फ में दब जाता है, तो वर्दी स्वतः सक्रिय होकर उसकी अंतिम लोकेशन रेस्क्यू टीम तक भेज देगी। इससे विशाल बर्फीले क्षेत्र में अंधाधुंध तलाश करने के बजाय बचाव दल सीधे सही स्थान पर पहुंच सकेगा और कीमती समय बचने के साथ जवान की जान बचाने की संभावना भी बढ़ जाएगी।
वैज्ञानिकों ने इस स्मार्ट वर्दी को इस प्रकार डिजाइन किया है कि धुलाई, मोड़ने और लंबे समय तक उपयोग के बावजूद इसकी तकनीकी क्षमता प्रभावित न हो। कठिन मौसम और ऊंचाई वाले इलाकों में भी यह प्रभावी ढंग से काम करेगी।
भविष्य में इस वर्दी में सैनिक के हृदय की धड़कन, शरीर का तापमान, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण जैविक संकेतकों की निगरानी जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा सकती हैं। इससे कमांड सेंटर को सैनिक की वास्तविक समय की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सहायता भेजी जा सकेगी।
DRMSRDE कानपुर के निदेशक एवं परियोजना प्रमुख डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने कहा, “सेना की जरूरतों के अनुरूप स्मार्ट वर्दी विकसित करने की पहल शुरू की गई है। यूपीटीटीआई के साथ मिलकर इसका प्रोटोटाइप तैयार किया जा रहा है। हमारा उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो हिमस्खलन, बर्फीले तूफान और अन्य दुर्गम परिस्थितियों में फंसे सैनिकों की लोकेशन तत्काल रेस्क्यू टीम तक पहुंचाए। भविष्य में इसमें सैनिकों के स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण संकेतकों की निगरानी जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा सकती हैं। यह तकनीक खोज एवं बचाव अभियानों को अधिक तेज, सटीक और प्रभावी बनाएगी तथा सैनिकों की सुरक्षा को नई मजबूती देगी।”
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्वदेशी तकनीक भारतीय सेना के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। विशेष रूप से सियाचिन, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और अन्य दुर्गम बर्फीले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए यह स्मार्ट वर्दी किसी जीवनरक्षक कवच से कम नहीं होगी। यदि परीक्षण सफल रहे, तो भविष्य में यह तकनीक भारतीय सेना की नियमित वर्दी का हिस्सा बन सकती है।



