- SIR पूरी हो चुके राज्यों में Form-6 से हटाया गया अतिरिक्त घोषणा-पत्र
- 30 सितंबर से लागू हुआ बदलाव
नई दिल्ली/VMN। नया वोटर बनने की प्रक्रिया अब आसान हो गई है। निर्वाचन आयोग ने SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) पूरा हो चुके राज्यों में Form-6 के साथ मांगे जा रहे अतिरिक्त SIR घोषणा-पत्र को हटा दिया है। अब ऐसे राज्यों में नए मतदाता को अपने माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड का ब्यौरा देने की जरूरत नहीं होगी।
आयोग के इस बदलाव के बाद 30 सितंबर 2026 से SIR पूरी हो चुके राज्यों में ECINET पोर्टल और संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल पर नया मतदाता पंजीकरण निर्धारित सामान्य Form-6 के जरिए किया जा रहा है।
SIR के दौरान Form-6 के साथ जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा-पत्र में आवेदक से यह जानकारी मांगी जाती थी कि उसका नाम अथवा उसके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं। नाम होने की स्थिति में विधानसभा क्षेत्र, पार्ट नंबर और क्रम संख्या जैसी जानकारी भी देनी होती थी।
2025 में बिहार से शुरू हुई थी व्यवस्था
SIR की यह प्रक्रिया 24 जून 2025 को बिहार में शुरू हुई थी। बिहार में SIR के दौरान पुराने मतदाता रिकॉर्ड के आधार पर मतदाताओं की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया अपनाई गई। बाद में SIR से जुड़े अतिरिक्त घोषणा-पत्र का इस्तेमाल नए मतदाताओं के Form-6 के साथ भी किया गया।
अब निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अतिरिक्त घोषणा SIR की अवधि तक ही लागू रहेगी। जिन राज्यों में SIR पूरी हो चुकी है, वहां सामान्य मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित Form-6 ही इस्तेमाल किया जाएगा।
अभी SIR वाले राज्यों में नियम अलग
जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी चल रही है, वहां SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता बनी रह सकती है। लेकिन SIR पूरी हो चुके राज्यों में नए वोटर को केवल नाम दर्ज कराने के लिए माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी का पुराना मतदाता रिकॉर्ड तलाशकर उसका ब्यौरा देने की जरूरत नहीं होगी।
यानी अब SIR पूरी हो चुके राज्यों में 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले नए मतदाता के लिए सामान्य Form-6 से पंजीकरण की प्रक्रिया पहले की तरह सरल होगी।



