अधिवक्ता कंचन सिंह मौत कांड में नया मोड़
पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर गांव पहुंचने तक फ्लैट सील करने की कार्रवाई पर उठाए सवाल, बोले—पुलिस की भूमिका संदिग्ध
प्रयागराज। धूमनगंज के पारस ग्रीन अपार्टमेंट में हाईकोर्ट की अधिवक्ता कंचन सिंह की मौत का मामला अब पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे गंभीर सवालों के कारण और गहरा गया है। मृतका के पिता बैजनाथ शर्मा ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी बेटी की मौत के बाद आरोपी दरोगा पति को बचाने के लिए पुलिस ने घटनास्थल और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की।
बैजनाथ शर्मा का आरोप है कि जब वह अपनी बेटी के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार के लिए गांव लेकर पहुंचे, तब तक पुलिस ने आरोपी दरोगा पति को बचाने की नीयत से फ्लैट को सील करने की कार्रवाई की। उनका कहना है कि घटनास्थल को तत्काल सुरक्षित करने और वहां मौजूद प्रत्येक साक्ष्य को सुरक्षित रखने के बजाय पुलिस की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
पिता ने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्यों से छेड़छाड़ किए जाने की आशंका है और पुलिस की भूमिका निष्पक्ष जांच के बजाय आरोपी दरोगा को राहत पहुंचाने वाली दिखाई दे रही है। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दहेज प्रताड़ना का भी आरोप, FIR
33 वर्षीय कंचन सिंह हाईकोर्ट में अधिवक्ता थीं। करीब दस महीने पहले उन्होंने उपनिरीक्षक जितेंद्र सिंह से प्रेम विवाह किया था। दोनों कानपुर के रहने वाले बताए गए हैं और प्रयागराज के धूमनगंज स्थित पारस ग्रीन अपार्टमेंट की नौवीं मंजिल पर रहते थे।
घटना से पहले पति-पत्नी के बीच विवाद चलने की बात सामने आई थी। कंचन के माता-पिता भी तीन दिन तक प्रयागराज में रहे थे और बेटी को समझाने का प्रयास किया था। शनिवार रात वे कानपुर लौट गए। इसके बाद कंचन के कमरे में जाने और दरवाजा अंदर से बंद करने की बात सामने आई। देर रात उनकी मौत की सूचना मिली।
पुलिस के अनुसार, घटना से पहले कंचन ने पति को वीडियो कॉल की थी। अन्य रिपोर्टों में एक पारिवारिक मित्र को संदेश भेजे जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन परिस्थितियों की अंतिम पुष्टि जांच से होनी बाकी है। घटनास्थल से सुसाइड नोट नहीं मिलने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है।
मृतका के परिजनों ने पति समेत ससुराल पक्ष पर दहेज और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया है और दरोगा जितेंद्र सिंह को थाने से हटाकर पुलिस लाइन भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
सबसे बड़ा सवाल—घटनास्थल की सुरक्षा और साक्ष्यों का क्या हुआ?
कंचन के पिता के आरोपों ने जांच की निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि घटनास्थल पर साक्ष्य मौजूद थे तो उन्हें किस प्रक्रिया के तहत सुरक्षित किया गया? फ्लैट कब और किस अधिकारी के निर्देश पर सील किया गया? घटनास्थल की वीडियोग्राफी और फोरेंसिक कार्रवाई कब हुई? मौके पर मौजूद मोबाइल, डिजिटल साक्ष्य और अन्य वस्तुओं को किस तरह सुरक्षित किया गया? इन सवालों का जवाब जांच से ही सामने आएगा।
मामले में अब पुलिस की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की मांग उठ रही है। मृतका के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच के बजाय आरोपी पुलिसकर्मी को बचाने का प्रयास किया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ऐसे में कंचन सिंह की मौत की जांच केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक सीमित न रहकर घटनास्थल, मोबाइल एवं डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, पति-पत्नी के बीच हुए विवाद और घटनास्थल पर पुलिस की कार्रवाई के हर पहलू से किए जाने की जरूरत है।
मामले में पुलिस की जांच और मृतका के परिजनों के आरोपों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घटनास्थल से मिले साक्ष्य क्या कहानी सामने लाते हैं।



